कुदरत के करिश्में.........
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जुड़वां बच्चे धरती पर ही
कुदरत से करिश्में होते हैं
अलग पहचान होकर भी
एक जैसे अचंभे होते हैं।
प्रकृति ने भाई बहन की
बनाई स्नेहिल जोड़ी है
खुशी के रथ पर सवार
प्रेम की चादर ओढ़ी है।
एक ही मधुबन की डाली
से दोनों पुष्प सुगंधित है
सृष्टि के बनमाली से ही
घर गृहस्थी पुलकित है।
भावुकता की बहे बयार
ये आंखें नम हो जाती है
अति आनन्द मंगल से ही
कमियां कम हो जाती है।
शुभ विवाह मुहूर्त से ही
अपनी बगिया न्यारी है
जीवन साथी के स्नेह से
ही खुशियां बलिहारी है।
दो परिवारों को सुखमय
ये जीवन गौरवशाली है
ईश्वर की अनंत कृपा से
ही घर समृद्धिशाली है।
एम.एल. नत्थानी