पिता भी अपनी संतान को सलीके से पहचानते
माँ तो कह देती है अपने दिल की सब बातें
कभी बोल कर कभी आँखों से आँसू बहा के
भले पिता की आँखों में आँसू जल्द न छलकते
अपनी औलाद का दर्द वे भी हैं बखूबी जानते
अपनी हैसियत से कुछ ज्यादा ही वे कर जाते
उनकी सुख चैन के ख़ातिर सब क़ुर्बान कर देते .