विषधर
चंदन के वृक्ष से, कभी न रखना प्रीत
चंदन सर्प है पालता, उसे न कोई प्रीत
गाय पालो, बैल पालो और पालो मीन,
सांप कभी न पालियो, उसे न कोई प्रीत,
नांग को कभी न सताये, ये न भूले बेर,
रहो तुम चाहे कही भी, गाँव हो या शहर,
ढोल - नगाड़े बजते ,छेड़े जाते सुर - ताल,
सावन के इस महीने में,नांगदेव पूजे जात ।
उमा वैष्णव
(मौलिक और स्वरचित)