ऊंगली पकडकर तुने चलना सिखाया।
माॅं! मुझे वो दिन बहोत याद आया ।
कहा था मेरा शब्दो से मेल ?
है खेल सारा तुने बताया ।
पढ़ेगा-लिखेगा तो होगा बड़ा।
हिम्मत से समाज में होगा खड़ा ।
तेरे जैसा प्यार जगमें नही पाया।
अपनी ममता को तुने खुब लुटाया ।
कभी तुने बेवजहा रोने नही दिया ।
खुदपर यकीन करना सिखाया।
कभी तुने भुके पेट न सुलाया ।
जरुरतपर मुँह का निवाला खिलाया।
तेरे हाथ स्वाद कभी भुल न पाया।
तेरी हँसी पर मैंने जग को लुटाया।
मेरा कर्तव्य भला मैं कैसे भुलू।
दुध का कर्ज मैं चुका न पाऊँ।
भगवान से यह है प्रार्थना मेरी।
हर जनम में यही माँ हो मेरी।