या रब तु बता...
हम हो गए मायूस तेरी रहमतों से ए खुदा।
धर-घर हूई बारिश बस धर मेरा रहा सुखा!
तूने जो दिया है वो काफी नहीं मुझे।
मेरे दिल धकडनो से क्या हुई है बोल खता
अब तक जो मिला है धोका ही मिला है।
झार झार रोये है हम होकर ईतने गमझदा!
तुझ से ना काहू तो किससे कहूं बता।
उम्मीद है छोटी तेरा रहमतों से दरिया भरा
दो कतरे तेरी रहमतों मुझे भी आता कर।
में सांस सूकुन की ले सकु ईतना कर अता
.........सायरा खान........