आज किसी ने मेरे बच्चों की तुलना करते हुए कहा—
“तुम्हारे बच्चे इतने खूबसूरत नहीं हैं… बस ठीक-ठाक हैं।”
मैं मुस्कुरा दी…
क्योंकि मुझे पता है,
रूप-रंग वक्त के साथ बदल जाता है,
पर संस्कार और दिल की खूबसूरती उम्र भर साथ रहती है।
मैंने शांति से कहा—
“मेरे बच्चों का चेहरा नहीं,
उनका दिल अच्छा होना चाहिए…
उनके संस्कार बड़े होने चाहिए।”
वो हँसते हुए बोली—
“इससे कुछ नहीं होता… बस खुद को दिलासा देती रहो।”
उसकी बात में ताना था,
और मेरे जवाब में सुकून।
मैंने बस इतना कहा—
“अगर दुनिया में सच में ऐसे लोग हैं
जो चेहरे नहीं, सीरत देखते हैं…
तो सोचो, वो इंसान कितना बड़ा होगा।”
बस…
मेरे इतना कहते ही
उसकी आवाज़ खुद ही धीमी पड़ गई।
क्योंकि
सच्चाई हमेशा चुप करा देती है,
और संस्कार… हर खूबसूरती से बड़े होते हैं। ✨