सुना....देखा.. समझा....
सुना है... 🥰
इश्क अक्सर घायल करता, 🌷
बिना खंजर के वार करता, 💞
बिना मौत के मार देता, 🌹
संवेदनाओ को शून्य करता, 💞
जिंदगियो को खामोस करता। 🌹
आज देखा भी.... 🥰🥰
उसको घायल घूमते हुए, 🌷
बिना चोट के निशान के, 💞
मानो मर सा गया हो अंदर से, 🌹
शून्य सी उसकी संवेदनाओ को, 💞
उसकी खामोसी वाली जिंदगी को। 🌹
समझ आया मुझको...... 🥰🥰🥰
क्यों घूमते घायल होकर, 🌷
बिना चोट खाये ही, 💞
बिना हथियार की मौत लिये, 🌹
सब संवेदनाओ को मार रहे यहाँ, 💞
अपने आप को खामोस कर रहे यहाँ। 🌹
🌹🌹भरत (राज) 💞