देखकर भी हर बार अनदेखा कर देते हो,
आंखो का इंतजार और गहरा कर देते हो।
कभी कत्ल हुआ करते थे जिन आंखो से,
उसी से अनदेखा कर, बार बार वार करते हो।
तुम ने भी कभी चाहा था, सपना दिखाया था,
अब मेरी इन्ही आंखो से नींद हलाल करते हो।
काश झांक लेते तुम भी कभी मेरी आंखों में,
देख लेते इश्क, इंतजार और जुदाई का दर्द।
रख लेते थोड़ा हमे तुम में भी कही किसी जगह,
थोड़ा हम भी जी लेते कोई गलतफहमी की तरह।
अब की बार मिलो तो, न जाने के लिए मिलना,
हर जनम का इंतज़ार, मिटाने के लिए मिलना