हा पता है हमें, तू नहीं करति प्यार हमसे,
इं तुम पे जो दिल आया है उसका क्या करे?
सुनती होगी मेरी हर बात तू ,या शायद नहीं भी,
पर अब हमारा तो दिल तूने ले लिया उसका क्या करे?
नही समझते तेरे आई कांटेक्ट को हम इशारा,
पर उसके लिये जी तडपता हैं,उस तडपते दिल् का क्या करे?
तेरी मुस्कुराहट को तेरा फिसलना नहीं मानता हम्,
पर तुझपे जो दिल फिसला है मेरा उसका क्या करे?
रहती होगी तू सिर्फ मुझसे friendly मेरे संग,
पर अब मेरे जेहेनने तुझे girlfriend मान लिया है,
हम पगले जेहन का क्या करे?
तू कैसी भी हो, पर अब दिल तुझे अपना मन लिया है,
तो कंबक्त इश्क़ का क्या करे?
चाहे तू जैसी भी हो ,
अब तुझे पराया थोड़ी समझेंगे?
बनना चाहता हूँ मैं जिंदगी तुझे,
तो ऐसा वैसा थोड़ी समझेंगे?
-विनायक....