आज उड़ान भरना चाहते हैं।
आसमान में पंख फैलाना चाहते हैं।
सादगी तो देखो इन लोगों की।
खुद ही मशाल बने फिरते हैं।
मौसम का रुतबा भी ऐसा है।
जासूसी में सब की खबर रखता है।
मेरी सारी अदा पर लहज़ा दिखता है।
फिर भी सब आंसु की दुकान रखते हैं।
हम मॉम तो नहीं पिघलते रहे।
आग के बागवान हम रखते हैं।