मुझसे दूर ही अच्छे लगते हो!
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तुम मेरे साथ नहीं
मुझसे दूर ही अच्छे लगते हो।
दुनिया सारी झूठी
इक तुम ही सच्चे लगते हो।
छिछली सी मैं नदी
तुम गहरा समंदर लगते हो।
तुम मेरे साथ नहीं
मुझसे दूर ही अच्छे लगते हो।
कूतर्क सी मैं
तुम व्याकरण से लगते हो।
खुश्क सी सर्दी मैं
तुम भावुकता की बारिश लगते हो।
तुम मेरे साथ नहीं
मुझसे दूर ही अच्छे लगते हो।
बंजर रेत सी मैं
तुम उपजाऊ मिट्टी लगते हो।
रेगिस्तान की नागफनी सी मैं
तुम मानसरोवर के कमल लगते हो।
तुम मेरे साथ नहीं
मुझसे दूर ही अच्छे लगते हो।
आधार शिला सी रक्खी मैं
तुम पूजन की मूरत से लगते हो।
मेरे दिल के दरवाज़े पर खड़े
तुम साक्षात विट्ठल से लगते हो।
तुम मेरे साथ नहीं
मुझसे दूर ही अच्छे लगते हो।