जौश में कैद आसमान रख
परिन्दो से ऊचीं अपनी उडान रख,
छोटी ही सही पर सबसे हटकर
एक अपनी अलग पहचान रख
अगर बच्चों से कुछ उम्मीदें है
तो पहले बुजुर्गो का मान रख,
सिर्फ सत्य,इन्सानियतको समझ ले बस
जरूरी नही़ तू गीता-कुरान रख,
जिस रिस्तेकी उम्र बढानी हो
एक फासला उसके दरम्यान रख,