*दोस्त कभी आना...*
दोस्त जब मन चाहे मेरे घर आना
मगर दरवाजे पर घंटी कभी ना बजाना.
पुकारना मुझे अपने अंदाज मे
मुझसे समय लेकर भी मत आना..
हा! एसा जरूर करना दोस्त
तुम अपना समय निकालकर जरूर आना...
फिर हम दोनो साथ बैठकर
अतीतमे बीताए लम्हे याद कर खुश होगे....
*और जब तुम लौटकर जाओ!*
ले जाना थोडा मुझे
और मेरा अपनापन
अपने साथ
और छोड जाना थोडा खुदको
और खुदके सामीप्यको
मेरे पास....