जो मिला नहीं उसको खोने का गम कैसा
जो होना हीं था उसके होने का गम कैसा .....
आजकल होंठों पर रखी हंसी ,झूठी हीं तो हैं
छूप छूप कर अकेले रोने में गम कैसा .....
डराया करता हैं जो महज ख्वाब हैं एक
हरेक रात अब तनहा सोने में गम कैसा .....
पतझड में किस पेड के ,पत्ते हैं नहीं टूटते
बंजर जमीं पर बीज बोने में डर कैसा .....
बुरे वक़्त में जब हो ,बुरे नजर से क्यूँ डरें
किसी अनहोनी जादू टोने का डर कैसा .....
...........,.......................................kishpal❤️