तू क्यों इतना सोचता है ?
क्यों इस वक्त के पीछे दौड़ता है ?
माना थोड़ा औरों से पीछे हैं !
पर क्यों तुझे फर्क पड़ता है ?
जो पास नहीं उसी के बारे में सोचता है !
और अपनी तुलना क्यों तू औरों से करता है?
हकीकत को क्यों तू स्वीकार नहीं करता ?
क्यों तू बीते पलों को याद करके अपने
आप को कोसता है ?
अपनी इस सोच को तो लगाम लगा!
बनना है तो एक पंछी बन ,
खोल अपने पर और उड़
चल जहां तू जाना चाहे,
एहसास कर हर एक पलका और ,
जो अच्छा लगे उसे तो रखो अपने पास,
खुद से प्यार करना सीख तू पहले,
उसके बाद ही तो और से आशा रख,
हर एक लम्हे में तू जीना सीख,
बुरा वक्त भी आए,
तो उससे तू लड़ना सीख,
देखना यह वक्त भी तेरा साथ देगा
हर घड़ी छाया बन तेरे पास ही रहेगा
बस तू अपने आप को टूटने ना देना
रख खुद में विश्वास,
सपनों की दुनिया से तू बाहर आ,
और हकीकत में तू जीना सीख,
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