वह गगन यह धरा
पवन भी वाया
सावन आया (२) हो सावन आया ।।
दूर-दूर से कोई हमको बुलाए
अंतर में कोई याद ही आए
दिल मैं है मेरे गीत माया
सावन आया (२) हो सावन आया ।।
वह अंबर मैं बिजलिया चमके
दूर जंगल में मोर भी टहूके
गीत में है मेरे मेघ की छाया
सावन आया(२) हो सावन आया ।।
फूलों में भी सुगंध भरी है
गीतों को भी वर्षा वरी है
कोकिल कंठ ने राग लगाया
सावन आया (२)हो सावन आया ।।
मेघ की गोद में हम सब खेले
धीरे धीरे कोयल बोले
मोर के गीत ने वन यह गजाया
सावन आया(२) हो सावन आया ।।