Hindi Quote in Poem by Chaman lal Bhardwaj

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वो जो तन्हाइयों का दौर था......

वो जो तन्हाइयों का दौर था, वक्त ही कुछ और था।
न शिकवा था कोई जमाने से
न कोई शिकायत बनाने वाले से
खुद ही मालिक दास स्वयं ही
चलता न किसी का जोर था
वो जो तन्हाइयों का दौर था, वक्त ही कुछ और था।

चलते थे कदम किसी भी ओर
न कोई रोकटोक न कोई विरोध था।
मंजिल के बिना बढ़ते ही जाते थे
जिस भी तरफ सुनता कोई शोर था।
वो जो तन्हाइयों का दौर था, वक्त ही कुछ और था।

न चिंता थी कर्म कमाई की, न परवाह थी रोजी रोटी की
न भय था महल चौबारों का, न लोभ था नोट हजारों का
परछाइयों के संग चले थे कठिनाइयों से नहीं भिड़े थे
तन्हा ही चल पड़ते थे न रात पता न भोर का
वो जो तन्हाइयों का दौर था, वक्त ही कुछ और था।

- चमनलाल भारद्वाज

Hindi Poem by Chaman lal Bhardwaj : 111809238
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