हिचकी का इशारा भी नहीं आता
ठहर गया है वक़्त कुछ नजर नहीं आता
कैसी है दुश्वारी, कुछ समझ क्यूँ नहीं आता
ऐसे लगता है मानो सदियाँ बीत सी गई हैं
उसके आने की कुछ खबर क्यूँ नहीं आता
सूनी पडी सड़क हर जगह वीरानी छायी है
उस सड़क से कोई राहगीर क्यूँ नहीं आता
हसरतें भी अब हो चली हैं मायूस, क्या कहें
शीतल हवा का कोई झोका, क्यूँ नहीं आता
बड़ी मुश्किल से सम्भाल रखा था खुद को
अब तो कोई किनारा भी नजर नहीं आता
बेचैनियाँ मेरी पहुँच गई तुम तक कैसे मान लूँ
अब तो कोई हिचकी का भी इशारा नहीं आता
बैठा हुँ रखकर हाथ पर हाथ कब से निराला
तरस गई आँखें उसका मेसेज क्यूँ नहीं आता
Sanjay Ni_ra_la... ✍️✍️✍️
28 May 2022#2040