नजाने आप इतना क्यों मुस्कराते है, दुसरो के दिल को बहकाते है ।
बातो में है आपकी अजीब सा जादू, नही होता फिर मन पे काबू ।
मुस्कान है आपकी मोतियों जैसी, फूलो पे ममसुम शबनम जैसी ।
नजाने आपका दिल है किसपे अटका, हमारा दिल तो सिर्फ आपकी बातों में है भटका ।
~ रुचिता गाबाणी