फलक सा रुतबा बस गया जी जान में,
उसके दिल में जगह पाली आसमा की तरह।
ये प्यासी बनी फिर भी पानी का बूंद नहीं पी रही,
मोहोब्बत करके एक आशा पूरे दिन भूखे रह कर याद कर रही।
दूर बैठे बैठे मेरी सांसों को ताउम्र बढ़ा ने की खुदा से इल्तिज़ा कर रही,
अश्कों में बसा हूँ दरबदर फिर ना जाने चांद के साथ मेरी सूरत को निहार रही।
मुस्कुराता चहेरा लेकर हसी हसी खुशी से पूरे दिन से राह तक कर व्रत कर रही है,
वो चांद की चांदनी जैसे रोशनी खुद हो कर एक हसीन सूरत को देखने मे लिए बेचैन हो रही।
happy karava choth💞💞🌹🌹
🌹 DEAR ZINDAGI 🌹