शानदार कविता ...
# विषय .प्रभु ***
प्रभु तेरी शरण तज कर ,शरण पाने कहाँ जाये ।
दिए दुःखदर्द दुनियाँ ने ,उसे भुलाने कहाँ जाये ।।
मिले मस्ती तेरे दर पर ,उस मस्ती को पाने कहाँ जाये ।
हमारी हर समस्या का हल तू ही ,तुझे छोड कर कहाँ जाये ।।
बहुत उलझी है जिदंगी ,उसे अब सुलझाने कहाँ जाये ।
तेरे दर पर आशा के फूल खिलते है ,उन्हें पाने कहाँ जाये ।।
तेरे दर पर दिल को शुकून मिलता है ,उसे तज कर कहाँ जाये ।
तू ही हमारी आखरी मंजिल है ,तुझे पाने ओर कहाँ जाये ।।
मन बहुत बैचेन हो जाये ,तो सुख शांति पाने कहाँ जाये ।
तू तो मालिक है सबका ,तेरे अलावा दूसरे को ढूँढ़ने कहाँ जाये ।।
किए है पाप अगणित से ,उन्हें धोने कहाँ जाये ।
तू ही मात्र हमारा सहारा ,तेरे को छोड कर अब कहाँ जाये ।।
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