भगवान ने कैसी ये अजब रचना रचाईं।
गोरी मिट्टी से जादुई स्त्री बनाईं।
दिल रखा उसमें ऐक काँच का टुकडा।
बेहता रखा उसमे भावनाओका झरना ।
जुबां पे हमेशा शक्कर की बोरी।
हाथो मे रखती वो अपनो की डोरी।
मिले चाहे नफरत या बेवफाओ की टोली ।
महोब्बत से भरती वो सबकी जोली।
ना कोई शिकवा न शिकायत करती।
हमेशा अपनो को समेट के वो रखती।
स्त्री है जहां की अजब सी जादूगरनी।
नैनो से अपने ये कत्ल कितने करती।
🙏जय श्रीकृष्ण 🙏