शाम
बचपन में पढ़ाई ना करने पर
मा अकसर कहा करती थी
शाम को तेरे बाबा को आने दे
तेरी शिकायत करती हूं।
और फिर पूरा दिन घड़ी में देखकर में खुदसे कहती थी आज शाम ना हो।
और फिर जब शाम को बाबा से डांट पड़ती थी तब आंख से आंसू और मन में गुस्सा आता था।
वैसे ही एक शाम
जब दसवीं कक्षा का परिणाम आया
और पहले नंबर पर स्कूल में आया
तब फिर मा ने कहा
तेरे बाबा को कहती हूं शाम को आते वक्त तेरे लिए तोहफा लाए
सोच कर इतनी खुशी हो रही थी आज बाबा की तरफ से तोहफा मिलेगा जब शाम को वह घर आएंगे।
और आज वही घड़ी में बार-बार देख कर खुद से पूछ रही थी शाम कब होगी?
शाम रात में बदली पर बाबा नहीं आए
रात दिन में बदली पर बाबा नहीं आए
आई तो सिर्फ उनकी लाश दूसरे दिन की शाम।
और आज फिर आंख में आंसू था और गुस्से की जगह शिकायत थी बाबा से।