# कविता ...
# विषय .तीर ***
नैनो के तीर ,चलाया मत कीजिए ।
नाजुक दिल को ,धायल मत कीजिए ।।
तुम तो सुदंरता का खजाना हो ,नित दशर्न ,
दीजिए ।
अपनी सुहानी दृष्टि से ,हमें कृतार्थ कीजिए ।।
मोर पंख धारण कर ,दिल चुराया मत कीजिए ।
बांसुरी की मीठी तान ,से दिल मोहित मत कीजिए ।।
तुम तो अनाथो के नाथ ,कृपा बरसाया कीजिए ।
धरा पर रहने वालो पर ,कुछ तो रहम कीजिए ।।
राधा के संग पधारा कीजिए ,अपनी चितवन से मन ,
को अपना बना लिजीए ।
कहता बृजेश तेरे बिन जी लगता नही ,अपनी मोहनी ,
रुप की झाँकी कराया कीजिए ।।
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