एक पल रुक जाओ,
एक बार ठहर जाओ
तो
एक बार बिखर भी जाओ।
लोगों की सोच पर मत जाओ
और
मत सोचो ज्यादा
की
लोग क्या कहेंगे? लोग क्या समझेंगे?
जान लो, लोगों का तो काम ही है कहना लेकिन तुम्हारा कर्म है आगे बढ़ते रहना।
यदि मानवता के मार्ग पर हो और अच्छे परिवर्तन के शिखर पर निगाहें है तो बस अपने आपको पहचानते रहो।
-Kirtipalsinh Gohil