सोच कर देख कभी उन तनहाइयोंको
जो मिलती थी तुझसे बिछड़नेके बाद...
वक्त था वो जिसमें जब ना तू होती थी
और होती थी मुलाक़ात तड़पनेके बाद...
आज साथ है हमसफ़र है फिर भी
भूल पाया नहीं वो तेरे रूठ जाने की याद...
प्यार तो तब भी था आज भी मोहब्बत है
पाता सुक़ुन जब करता हूँ उन लम्होको याद...
-निर्दोश