उसकी नज़रे सवाल करती है
हा बार बार करती हैं।
मेरी उदासी जब वो आंसू बहाती है,
जगाती रात भर पल भर सो ना पाती हैं।
मुझे से पूछती हैं चाह कैसी,
तुझे मेरी परवाह कैसी है।
मेरी खामोशी भी खामोश हो जाती हैं,
उसकी खामोशी जब भी सवाल करती हैं।
सारे सवाल का हल देता ,
दिल जो मेरी सुनता मै हर पल प्यार करता
हा बार बार करता ।
काश मै दर्द बता पाता जो ज़ख्म है दिखा पाता,
सोए रहता आगोश में उसकी,
उसके सवालों का जवाब खोज लेता।
कैसे कहूं अब प्यार नहीं होता,
मुझ से वो बार बार नहीं होता
तोड़ा नहीं है दिल तूने,
फिर अब दिल कैद नहीं होता
मेरे ज़ख्म इतने पुराने हुए
वो बात को बहुत जमाने हुए।
भरवाता मरहम तुझ से मै,
जो ज़ख्मों का दर खोज पाता
तेरे सवाल बिल्कुल जायज़ है
तू खुदा की मुझ पर इनायत है
चाहती हैं जितना है बस में,
रहता हूं तेरे रग रग मे,
तेरे खातिर फिर से रंग देता खुद को
जो रंग है प्यार वो रंग खोज पाता।
मुझे सवार देगी ये जनता हूं मैं
तू फ़कीर नहीं ये मानता हूं
तेरा ख़ुदा अरे नहीं मुझ सा कोई नहीं,
सारी बात मानता जो खुद को मना पाता मैं