तुमने बाटा है मुझें संसार के लिये ,
हम सिर्फ तुम्हारे थे प्यार के लिये ।
जो दर्द तुमने दिया बाटते रहते है ,
अपने आरजू अपनी इतमीनान के लिये ।
किसे पता की जिन्दगी कितनी ,
तुम आ जाओ किसी शाम के लिये ।
मिलना ना हो तो कोई बात नही ,
एक बार आ जाओ बस नाम के लिये ।
तुझे देखने के लिये तस्वीर छुपा रखी है ,
एक और दे जाओ इल्जाम के लिये ।
शरद है रात साथ काली है ,
तुम आना भी तो सारे इन्तजाम के लिये ।
तुम्हे नाज होगा ना खुद पर ,
कैद कर रखी है गौरईया उम्र भर के लिये ।
वो उड़ सकी जो तुमने पिजड़ा खोल भी दिया ,
वो कैद होना चाहती इस उम्र के लिये ।
हजार खत लिखे और जलाए ,
ना लिखे कुछ भी तुम्हे पहुचाने के लीये ।
ये बात और है तुम पहुच में मेरी ,
छोड़ जाओ कुछ दाने मेरे उम्र के लिये ।