बात आप की - याद आप की
----------------------------------
तस्वीर एक दिल से मिटाई नहीं जाती
यादें आपकी है जो भुलाई नहीं जाती
बात बिगाड़ती है, तो बिगड़ती है ऐसे
के बिगड़ी बात फिर बनाई नहीं जाती
जोश जोश में हर बात बयाँ की,लेकिन
दास्तान-ए-ग़म है कि सुनाई नहीं जाती
बरपा हो जो दिल पे बेहिसी का कहर
ग़ज़ल फिर कोई गुनगुनाई नहीं जाती
हर सिम्त रंगीनियां बिखरी है 'सन्तोष'
बेरंग ज़िंदगी अपनी दिखाई नहीं जाती
----------------------
- सन्तोष दौनेरिया
(बयाँ - वर्णन करना, दास्तान ए ग़म - दुःखी दिल की कहानी, बरपा - खड़ा हुआ, बेहिसी- संवेदना शून्यता, क़हर - संकट, सिम्त - दिशा)