वो तशरीफ़ लाये हैं मुद्दतों बाद मज़ार पर
मौत मिली थी हमें उनके ही गवाह पर
अब जब गुजर गए तब आए वो इकरार पर
फ़तवे फिर से जारी होंगे तेरे कब्र ए दीदार पर
हम कतरा थे हमें छोड़िए जाँ लुटाइये साहिल ए यार पर
ज़माने के हैं यही दस्तूर
गला मिलके काटिए एतबार पर
-ख़ानाबदोश