न जानें कैसी चाहत है , तेरा ये कैसा जादू है
बिन देखे रह नहीं सकता , मगर खिड़की से छुप - छुप कर
बहाने लाख ढूढूं मैं , तेरा दीदार करने को
तुझसे जब सामना होता , जुबां चलती है रुक - रुक कर
तेरे सपनों में खोते ही , रैन कट जाए दो पल में
सोचूं जब बात करने को , दिल मेरा धड़के धक - धक कर
मेरे पहलू में तुम आओ , ये दुनिया चमन बन जाए
दूरी अब सही ना जाए , थके ये नैन तेरी राह तक - तक कर
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