ये वो एहसास है, जब हम पहली बार बिना माता-पिता के घर से बाहर निकलने की सोचते हैं।
मेरी जिंदगी का एक खूबसूरत पल आया,......(2)
पर वह अभी साकार नहीं हुआ,
होने वाला है,
इसलिए दुआ है "भगवान" से....(2)
न लाना अड़चन कोई,
फिर वह पल जियूँ ऐसे,
न फिकर हो कोई,
जी लेने के बाद,
न पता चले किसी को,
कब जिया मैंने वो पल,
जो हैं मेरी जिंदगी का अनमोल पल।.....(2)
आँखों में रहे वह पल,
यादों में हँसाए वह पल,
कभी न भूल पाए वह पल,
पर कभी जुबा पे न आए किसी के,
जिन-जिन ने जिऐ ये पल।.....(2)
(ज्योति कुमारी)