कभी कभी मैं मौन हो जाती हूँ,
यूँही ख़ामोश, चुपचाप सी तन्हा..
ऐसा नहीं है कि कोई पास नहीं है मेरे,
पर कभी कभी सिर्फ ख़ामोश हो जाने को मन करता है..
पर ये खामोशी भी कहां ख़ामोश है..
हर वक़्त तो कानों में एक शोर रहता है..
बन्द भी कर लूं कानों को अपने..
फिर भी एक शोर हर वक़्त मेरे दिल में होता है..
तकलीफ बहुत देते हैं मुझे नजारे दुनिया के,
कभी कभी बस आंखे मूंद लेने को मन करता है
पर कहां सुकून है दिल को आंखे बंद कर देने से,
यूँ बन्द आँखों से भी तेरा नज़र होना बहुत तकलीफ देता है..