स्त्रियों से मत पूछना उनकी
पीड़ाओं की कहानी तुम
दुख की मात्रा और
सुखों की रवानी तुम।
क्योंकि वो नहीं होने देती जाहिर
लफ़्ज़ों में अपने एहसासों को
और तुम समझ सको उनके
जज्बातों को इतना महान
अभी बने नहीं हो तुम।
स्त्रियों के सम्मुख आने से पूर्व
बाहर खूंटी पर उतार आना
पुरुष होने का अहंकार तुम ,
मिलने से पहले ,देहरी लांघने से पूर्व
अपने साथ लाना थोड़ा धैर्य तुम।
एकांत में सौम्यता से पूछना
स्त्री के विरह का अनुभव
उनकी पीड़ाओं की कहानी,
उनके बलिदान की दास्तान
अपने हृदय में लिए प्रेम तुम।