"इश्क तू न मिला"
मैं इश्क खोजता फिरा,
वो दूर जाता रहा।
कोई समझा नही,
दर्द छुपाकर के मैं,
बनावटी हँसता रहा।
रूह तलाश में सकूं के भटकती रही,
मैं बैचेन खुदको ढूंढता रहा।
मैं इश्क खोजता फिरा,
वो दूर जाता रहा।
दिखे बज़्म में चेहरे कई,
हर कोई खेलकर जाता रहा।
कोई समझे नही,
मेरी चाहत है क्या?
खोजी महोब्बत,
मुझे गम ही मिला
मैं इश्क खोजता फिरा,
वो दूर जाता रहा।
रो रहा है मेरा दिल,
ए सकून कहीं तो मिल।
तुझे खोजा भी जहां,
तू मिला नही वहां।
अब तक का सफर,
अल्फाज़ों में लिखता रहा।
मैं इश्क खोजता फिरा,
वो दूर जाता रहा।
©️स्वरचित