मे तो वैसे ही भाग्य से मिला हुआ हूँ,
सरारत शहने पर जिंदा राख हुआ हूँ।
कुदरत के करिश्मा की तरह बदला हुआ हूँ,
जब चाहे जो चाहे उससे चोट खाया हुआ हूँ।
मेरी तकदीर में नहीं है वो ए ख़ुदा
फिर भी दिल में बसाया हुआ हूँ।
अरमान लगा कर जख्म को
और गहराई से मैं दम घुटा रहा हूँ।
ख्वाब जन्नत के देख तो लिए है, अब
तसल्ली पा कर जुठी आजमाइश कर रहा हूँ।
ख्वाहिश से बने सपनों को हर वक़्त
नज़रियों से नजरो को चुरा रहा हूँ।
दिल, रूह, जिस्म, खयाल, बेचैनी,
बे नकाब बने चिल्लाता रहा हूँ।
क्यू हर कोई मेरी नादानी से इश्क़ के पर्दे का साया आईनो में से भी खींच रहा है?
में अब आंसू नहीं निकालूंगा , ना उससे बहश करूंगा, वो कहेगा वहा जानकर भी मौत को पाउँगा,
जितनी बार उस शक्श की गलतियों पर भी मुस्कुराके दुनिया से गुमनाम ही जाऊँगा।
DEAR ZINDAGI 💞