एक बड़े ही विशाल और घने पेड़ पर एक लाल परिंदा रहता था। उसका एक छोटा नन्हा बच्चा था, जिसका नाम चीनू था।
लाल परिंदा जितना ख़ूबसूरत था उतना ही ईमानदार, दयालु और परिश्रमी भी था। सभी उसे बहुत चाहते थे और उसका सम्मान करते थे। वह उस पेड़ का राजा था।
वह परिंदा चीनू से बेहद मोहब्बत करता था। बहुत लाड़ से पला हुआ चीनू उसकी जान था। परिंदा उसे अपने सिर पर बैठाकर रखता था। रात-दिन उसकी बहुत परवाह करता मगर साथ ही पूरी आज़ादी से चीनू को दूर गगन में उड़ने देता। चीनू अपने ख़ूबसूरत रंगीन परों को फैलाकर खूब उड़ता मगर खो जाने के डर से ज़्यादा ऊँची और दूर की उड़ान नहीं भरता।
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एक दिन किसी शिकारी की नज़र उस प्यारे लाल परिन्दे पर पड़ गई। वह शिकार करने आ गया। उस वक़्त चीनू लाल परिन्दे के सिर पर बैठ मस्ती कर रहा था। लाल परिन्दे ने शिकारी को देख लिया और चीनू को उड़ने के लिए कहा, चीनू कुछ समझ पाता उससे पहले ही शिकारी ने लाल परिन्दे पर तीर चला दिया। लाल परिंदे ने फुर्ती से सिर पर बैठे चीनू को पेड़ से नीचे फेंक दिया।
चीनू नीचे गिर गया, और बेहोश हो गया। फ़िर जब उसे होश आया तो उसने देखा कि उसके आसपास बहुत सारे रंग बिरंगे परिन्दे थे। वह सब कभी उसे तसल्ली देते, तो कभी कुछ और कहते। कोई कहता लाल परिन्दे को शिकारी ने मार दिया, तो कोई कहता वो उसे अपने साथ ले गया है वह वापस कभी नहीं आएगा। मगर चीनू सब अनसुना कर आँखों को खोल-खोलकर चारों ओर लाल परिन्दे को ढूंढ रहा था। मगर वहाँ केवल उसके लाल-लाल पर बिखरे पड़े थे, लाल परिंदा कहीं नहीं था। चीनू ने रेंगते हुए उसे बहुत ढूँढा लेकिन वो नहीं मिला।
चीनू बेसुध सा अपने आशियाने की और देखा तो वो भी उजड़ चुका था।
वो कुछ देर यूँही ज़मीन पर पड़ा रहा फिर खुद को संभाल, हौसला देते हुए.. उसने जब अपने पर फैलाए तो देखा, पर आधे टूट चुके थे। शायद उसके पेड़ से नीचे गिरने के पहले ही शिकारी का तीर उन्हें तोड़ चुका था। उसने दूर गगन की ओर देखा.. अब वो कभी उड़ नहीं पाएगा।
वो रेंग रेंग कर लाल परिन्दे के परों को उठाने लगा।
उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि यह सब क्या हो गया। बहुत सवाल थे उसके मन में.. वो कभी लाल परिन्दे के बगैर रहा नहीं तो अब जीएगा कैसे..? जीएगा भी तो ख़ुश नहीं होगा। हाँ खुद को ख़ुश दिखाएगा ज़रूर।
या शायद चीनू, लाल परिन्दे के वापस आने का इंतज़ार करेगा। लाल परिंदा भी तो चीनू के बगैर रह नहीं सकता।
अरे दोनों को आदत ही नहीं है।
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सिर पर बैठकर राज करने वाले जब यूँ ज़मीन पर गिरते हैं ना, तो उनको चोट नहीं लगती.. वो टूट जाते हैं।
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