अंबर में बैठा चांद कितना हसीन लगता है,
सितारों के साथ कितना ख़ुशी से रहेत्ता है।
उठते ही निगाहें हमारी वो जमीन से दिखता है,
फिर क्यों इतना अपनी अदा पर इतराता है।
बादल कहीं गुमने चले बिनमौसम हर जगह,
चांदनी रात को दिखता चांद अमावश में छुप जाता है।
कमी यहां बहुत है आसमान में रहकर भी ,
खूबसूरत चहेरे पर काज़ल का धब्बा लगाया फिरता है।
खुदा से इश्क़ के बहाने जुठी मजा ले कर चले होगे,
यह जमीन पर ज्योतिष से लकीर की नियति जाना जाता है।
अब क्या कसूर निकला जाए मोहोब्बत में,
जाहिर है चांद को सितारों से कभी दूर होना होता है।
DEAR ZINDAGI 💞🌹