यह कविता मेरी बेटीयों को समर्पित ..
मेरी बेटी श्वेता पंडया के साथ ...
# विषय .बेटी ,जाया ,लाडली "
# विधा .कविता *********
नन्ही मुन्नी राजकुमारी ,बेटी तू अनमोल है ।
तुझें पाकर मेरा धर खिल गया ,तू तो बेमिसाल है ।।
तेरी सुदंर आवाज से ,गुंज उठा मेरा धर द्वार है ।
सौभाग्यशाली है वो धर ,जहाँ तेरे नन्हे कदम पड़ते है ।।
सुख समृद्धि दौडी आती ,तू सुकून के पल देती हो ।
बेटी तुझे देख कर ,हमारा मन मयूर नाच उठता है ।।
तू जहाँ से निकलती ,वह वादी भी खिल उठती है ।
तेरी एक झलक पाने ,हमारी आँखें तरसती है ।।
तू तो दो कुलों की रक्षा ,लाज रखती हो ।
भाई के हाथ राखी बांध ,अपना रिश्ता निभाती हो ।।
तेरे बिना यह संसार ,सूना रेगिस्तान लगता है ।
बेटी तेरे बिना यह संसार ,एक पल नही चलता है ।।
तू ही माँ दादी नानी बहना ,के रुप धरती हो ।
इसलिए बेटी तू जग में ,अनमोल हीरा कहलाती हो ।।
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