स्नेह
बहुत दूर तक
तुम्हारी याद आयेगी,
सुबह का उगता सूरज
क्षितिज से डूबती सन्ध्या
तुम्हारी झिलमिल याद को
आकाश तक ले जायेगी।
बहुत दूर तक
मैं तुम्हें भुला न पाऊँगा
कि कल तक
तुम मेरे लिए अनजान थे
मैं तुम्हारे लिए अनजान था
लेकिन आज अचानक
ऐसा लगता है
कि बहुत दूर तक
तुम्हारी याद आयेगी।
मेरी यात्रा के पड़ाव
तुम भी हो,
प्यार कुछ यहाँ भी बना था
प्यार कुछ यहाँ भी टूटा था
नींद जब खुलेगी तो
जीवन का अन्वेषण शुरु होगा
और बहुत दूर तक
तुम्हारी याद आयेगी।
*यहेश रौतेला