है खेल लफ्ज़ की सकल में रुहाना
मौसम ए महोबत ,जिंदगी सुहाना
हर कदम ,हर साँस में नेक करम ही
ईबादत अपनी ,बस जिंदगी रुहाना
=======================
शुक्रगुजार हुं खुदा ,ईबादत में
हर दिल तेरे नूर से ,चमकता है
वोह अहदे वफा ,हौसला बुलंदी
हक़ फरमाता बस ,हकीकी है
=======================
दर्द का अलम ना पुछीए,
जख्म ही दोस्ताना है,
अश्कों मेछुपी है राहत शबनमी
खुरशीद को कुछ ना पुछीए
=======================