#जीवन की कटुता
अब सफ़र हुआ आसान जीने का...
ना अब लड़ता कोई अख़बार के लिए,
ना अब मुड़ते पन्ने, भविष्य, कार्टून कि कोलम भी है शांत कौने में।
कि अब सफर हुआ आसान जीने का...
टेबल पर थालियों, कटोरी, चम्मच ने भी,
सभा बुलाई है।
आचार भी चटपटा ना रहा, मीठा बेस्वाद,
न अब रोटी कोई बांटता, दाल सब्जी भी
फिक्के हे में छोके में।
कि अब सफ़र हुआ आसान जीने का।
छत,रास्ते, बारिश का पानी भी अब शांत हे,
ना अब कोई उछलकूद ना वो कागज़ की कश्ती,
सब कुछ हे सब के पास बस अकेला हूं मै।
सच हां सच कि अब सफ़र हुआ आसान जीने का(२)
मेघा....