आहिस्ता चल जिंदगी,
अभी कई कर्ज चुकाना बाकी है।
कुछ दर्द मिटाना बाकी है,
कुछ फर्ज निभाना बाकी है।
रफ्तार में तेरे चलने से कुछ रूठ गये, कुछ छूट गये।
रूठों को मनाना, छुटे हुये को जुटाना अभी बाकी है।
कुछ हसरतें , कुछ जरूरी काम अभी बाकी है।
ख्वाईशें जो दबी रही इस दिल में
उनको दफनाना अभी बाकी है।
कुछ रिश्ते बन कर टूट गये,
कुछ जुडते जुडते छूट गये,
उन टूटे और छूटे रिश्तों के जख्म मिटाना अभी बाकी है।
तू आगे चल मै आती हूँ,
क्या छोड कर तुझे जी पाउंगी?
इन सांसो पर जिनका हक है
उनको समझाना अभी बाकी है।
आहिस्ता चल जिंदगी,
अभी कई कर्ज चुकाना बाकी है!!!