अफसाने और भी है..इश्के जूनुन के
ऐ दिल पहेले जरा संभलजा..
सुनते सुनते
तु कही घडकना न भूल जाये..
मौजूदगी तेरी ..ऐ दिल मुझे
उनकी यादो मे खिच ले जाती..है
"दुआ कर"
कही वो यादो का मंजर
न बिखर जाये...
लौट आता हु अकसर..अघूरे
ख्वाब से..
बस यही सौचके...कही वो
ख्वाब में से भी रूठ कर
न चली जाये..