चलो अब तिरंगा लहराया जाए,
दूर दूर तक एक लहर सी छा जाए ..
धरोहर जिन स्तम्भों पर खड़ी है बरसों से,
उन स्तम्भों को फिरसे टिकाया जाए..
तेरा मेरा करना सब छोड़कर अब,
एक नया भारत बनाया जाए...
उखाड़ फेंको हाफ़िज़ और अफ़ज़ल को,
भगत और अशफ़ाक़ को ज़हन में लाया जाए..
ये तपोभूमि है साधू और फकीरों की,
इसे फिर से कब्रिस्तान न बनाया जाए...