पहले जैसी गर्मी की छुट्टियाँ अब कहाँ
वो नानी के घर जाने का उत्साह
अब फ़ारेन ट्रिप में तब्दील हो गया है
वो दोस्तो के साथ ऊधम मचाते बच्चे
मोबाइल पे खेल कर खुश हो जाते है
वो तपती धूप में खेलते खेलते पेड़ तले छिप्ने का अद्भुत आनंद
अब ऐअर कन्डीश्नर वाले कहाँ ढून्ढ पाते हैं
वो गर्मियो में आम खाने का अस्ली मज़ा तो छीन झपट्कर खाने मे आता था
उसे कांटे छुरी से खाने वाले क्या समझ पाते है
वो हर छुट्टी मे चोट लग्ना
और फ़िर मिटटी लगा कर तुरंत दौड़ने लग्ना
नानी से हर रोज़ कहानिया सुनना
नये पक्वानो की फ़रमाइश करना
नानी दादी के आन्चल मे बीता जो बच्पन
अन्मोल दिनो की यादें दिलाता है
और ये छुटटिया आते ही
मेरा मन फ़िर उदास हो जाता है
और दिल मे एक ही ख्याल आता है
अब तो बस अव्काश घोषित हो जाता है
पहले जैसी गर्मी की छुटटिया अब कहाँ.