अब नहीं करता बात मुझसे
पर उसकी बातें अब भी
गूँजती है मन के बंध कमरे में
अब नहीं मिलती खबर उसकी
पर मेरी कहानियां
हमेंशा छेड़ देती है ज़िक्र कोई
अब नहीं होती रस्में
रूठ ने मनाने की
पर दिल कहता है
मेरी उदासी में उदास है वो
बस महज़ कहने को,
अब नहीं इश्क़ मुझसे
फिर भी मेरी धड़कन है वो।