एक आदमी था जो ज़िंदा था उसके पास था
मरा हुआ में चलते चलते कुछ कहने चला आया
मेरी हंसी उसके पास रह गई
दिल में दर्द लेके चला आया
मेरे ख़्वाब उसके पास रह गए
टूटा हुआ में चला आया
मेरे हर वो ख़ुशी के पल छोड़ कर
गुमसुम सा में घर चला आया
उसके जिस्म की खुश्बू को उसी कमरेमे छोड़ कर
तनहा अकेला में उस खुश्बू से कंही दुर चला आया
एक वफ़ा की बेवफ़ाई देख कर
आंसू की बारिश में भीगता चला आया
छोड़ के उसको खुस उसकी दुनियां में
ग़म के दरिये में डूबने अकेला चला आया
बीते पल को गुजरा कल बना कर
एक कहानी सा वो कल लेके आपको कहने चला आया