जिंदगी दी है तो जीने का हुनर भी दे दे।
पाँव बक्शे हैं तो तौफीके सफर भी दे दे।।
ये गुफ्तगू तूने ही सिखाई है के मैं गूंगा था अब मैं बोलूंगा तो बातो मै असर भी देना।।।
मेरे उलझे हुए ख्वाबो को तराजू दे दे।
मेरे खुदा मुझे जज्वात पे काबू दे दे।।
मैं समुन्दर भी किसी गैर के हाथों से न लूं और एक कतरा भी समुन्दर है अगर तू दे दे।।
देवेश मिश्रा एडवोकेट।।