इन चिरागों को जला दे रात बाकी है अभी
खोल दे पट जिन्दगी की जंग बाकी है अभी
अंगूर लतिका से झरी यह भूमि की आबे हयात
बख्श दे शायद सुकूँ नवरंग बाकी है अभी
अभी तो कुछ और प्याले कर रहे अठखेलियाँ
जा रहा मयकश कहाँ जब संग साकी है अभी
टूट जाने दे भरम अरमान की बदमाशियाँ
ठहर कुछ पल महफिलों का रंग बाकी है अभी
तृप्त होना चाहती कमजर्फ बढ़ती ख्वाहिशें
तिक्त औषधि की तड़प की जंग बाकी है अभी
थोड़ी मोहलत और दे दे मयकशी माया लसी
रात की अन्तिम घड़ी का संग बाकी है अभी
अन्त में सिसकी बचेगी या छलकता मैकदा
मोह का बिस्तार होना भंग बाकी है अभी
टूटकर सब बिखर जायें या तो पैमाने सभी
उषा की दिलकश अदा का ढंग बाकी है अभी
Kuber Mishra